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Thursday, 18 June 2020

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण योजना 2020 (CG Mukhyamantri Suposhan Yojana) - कुपोषित महिलाओं व बच्चो के लिए पौष्टिक आहार

**मेरे प्यारे साथियो** आज हम आपको  छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण योजना (Chhattisgarh Mukhyamantri Suposhan Yojana) 2020 के बारे में बताएंगे। सीजी हरिक नानी बेरा अभियान (CG Harik Nani Bera Campaign) के तहत राज्य सरकार प्रदेश में महिलाएं और बच्चे जिनमे कुपोषण (पोषण की कमी) और एनीमिया (शरीर में खून की कमी) के लक्षण है, उन्हें पौष्टिक खाना उपलब्ध कराएगी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुपोषण योजना को पूरे राज्य में महात्मा गाँधी जी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर 2019 को शुरू किया था। 
इस सरकारी योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में महिलाओं और बच्चो की मृत्यु दर को कम करने के लिए किया था। बच्चों को मूंगफली और गुड़ से बने लड्डू देकर मुख्यमंत्री सुपोषण योजना की शुरुआत की थी।  नीति आयोग द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि अकेले छत्तीसगढ़ में 5 साल से कम आयु के 37.60% बच्चे कुपोषण से पीड़ित है और 41.50% महिलाएं अनीमिया से पीड़ित है और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है, जिसके चलते सरकार ने मुख्यमंत्री सुपोषण योजना की शुरुआत की है। 
प्रदेश की सरकार ने अगले 3 साल में छत्तीसगढ़ को पूरी तरह से कुपोषण और एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। जिसमे हरिक नानी बेरा खुशहाल बचपन अभियान छत्तीसगढ़-सुपोषण योजना ( CG CM Suposhan Abhiyan) की महत्वपूर्ण भूमिका है।  

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण योजना 2020 (Chhattisgarh Mukhyamantri Suposhan Yojana)

कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण योजना 2020 की शुरुआत की गयी है जिसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:- 
  • बच्चों और माताओं को हर रोज मुफ्त पौष्टिक भोजन दिया जाएगा। इस छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण के अंतर्गत सभी 0 से 5 साल के बच्चे तथा 15 से 49 साल की लड़कियां या महिलाऐं लाभान्वित होंगी।     
  • छत्तीसगढ़ सरकार सप्ताह में दो बार अंडे, गुड़ और मूंगफली से बने लड्डू उपलब्ध कराएगी। 
  • प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा चिन्हित लाभार्थियों को प्रतिदिन मुफ्त फूड स्कीम के तहत पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। 
  • हरिक नानी बेरा अभियान को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बस्तर जिले में पहले से ही शुरूकर दिया गया था। जहां विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रो पर लगभग 70,000  बच्चों और 9,000 माताओं को पौष्टिक भोजन मिल रहा था। इस पायलट प्रोजेक्ट को अब पूरे राज्य के लीये लागू कर दिया गया है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस सुपोषण अभियान को लागू कराएगी जिसमे लोकल खाने को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य सरकार कुपोषण दूर करने के लिए माताओं व बच्चो को आयरन की गोली भी देगी।         
  • इसके अलावा प्राथमिकता के आधार अनुसार फल, दूध, अंडे, सोया आदि उपलब्ध कराने के लिए DMF (जिला खनिज फॉउंडेशन) को लगाया जाएगा। 
  • इस हरिक नानी बेरा अभियान को प्रसिद्ध धर्मार्थ संगठनों, जनप्रतिनिधियो, गैर सरकारी संगठनों, मीडिया समूहों और जिले के अन्य कुशल लोगो के माध्यम से राज्य में जगह-जगह फैलाया जाएगा। 
  • चावल, चीनी, नमक और मिट्टी का तेल देने के लिए प्रदान करने के लिए (PDS) सार्वजानिक वितरण प्रणाली सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा। 
  • इसके अलावा राज्य सरकार 2 किलो गुड़ हर महीने मुफ्त में उपलब्ध कराएगी। 
  • आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल और अन्य वितरण केंद्रों को जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित किया जाएगा जहाँ से लोगों को पौष्टिक भोजन मिल सकेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है की इस कुपोषण से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण योजना और छत्तीसगढ़ हरिक नानी बेरा खुशहाल बचपन अभियान 2020 (Harik Naani Bera Joyful Childhood Campaign) को पूरी तरह से सफल बनाया जाये। इसके लिए वे समाज के हर वर्ग को इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और उन्हें इस योजना से जुड़ने या भाग लेने की अपील करेंगे। 

सीजी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की प्रगति (15 जून 2020 तक)

अब तक छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के द्वारा कुपोषित बच्चों की संख्या में 13.79% की कमी आ चुकी है। वज़न तिहार 2019 के डाटा के अनुसार, करीब 9.70 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार थे। मार्च 2020 तक 67,889 बच्चे कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ चुके हैं। यह कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। 

राष्ट्रीय पारिवारिक सर्वेक्षण (National Family Survey) 4 के अनुसार, करीब 37.7% बच्चे (5 साल से कम उम्र के) कुपोषण का शिकार हैं। साथ ही करीब 47% महिलाऐं जिनकी उम्र 15 से 49 साल के बीच है, वो एनीमिया से ग्रसित है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 9.7 लाख बच्चे कुष्पोषण का शिकार है जो ज्यादातर आदिवासी या दूर दराज़ के जंगली क्षेत्र से आते है।

मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के अंतर्गत बच्चो और महिलाओं को लोकल पौष्टिक भोजन और पूरा पका हुआ खाना दिया जा रहा है। इसके साथ ही चिन्हित लाभार्थियों को पूरक पौष्टिक आहार भी आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध करवाया जा रहा है।  एनीमिया से ग्रसित लोगों को आयरन (iron), फोलिक एसिड (folic acid) और antihelminth की गोलियां भी दी जा रही हैं। 

कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते कुछ समय के लिए सभी आंगनवाड़ी और मिनी आंगनवाड़ी केंद्र को बंद कर दिया गया था। ऐसी परिस्तिथि में मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बच्चों के पौषण स्तर को कायम रखने के लिए पका हुआ भोजन प्रदान करने की व्यवस्था करवाई है। इसके तहत अब तक 28,78,000 लाभार्थियों को 51,455 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पौष्टिक खाना उपलब्ध कराया गया है। 

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री सुपोषण योजना 2020 के अंतर्गत सूखा राशन प्रदान करने की भी व्यवस्था की गयी है।  इस योजना का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य को कुपोषण मुक्त बनाना है। 

गाँधी जयंती (2 अक्टूबर 2019) को लॉन्च हुई अन्य योजनाओ की सूची

> छत्तीसगढ़ सरकार नई खाद्य नीति-एपीएल (Above Poverty Line) गरीबी रेखा से ऊपर /बीपीएल (Below poverty line) गरीबी रेखा से नीचे परिवारों को देगी सब्सिडी पर चावल।  
>  छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना 

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